अंजना और केसरी दंपतियों को वायुदेव का वरदान से जनित पुत्र थे हनुमान। वह रुद्रांश संभूत थे। एक बार सुर्यग्रहण काल में सूर्योदय के समय सूर्य को एक फल समझकर उसे खाने की अपेक्षा से हनुमान ने अंतरिक्ष तक छलांग लगाई। उसी समय राहु भी सूर्य को निगलने आगे बढ़रहा था। तब हनुमान सूर्य को छोड़कर राहु की ओर बढ़ने लगा, देवेन्द्र ने अपनी वज्रायुध से हनुमान पर प्रहार किया। इससे हनुमान बेहोशहोकर धरतीपर गिरगया। अपने पुत्र की ऐसी स्थिति देखकर वायुदेव कुपित होकर पुत्र को लेकर एक गुफा में छिपगया। उसके पश्चात् सभी देवताएँ वहाँ पहुँचकर हनुमान के कई वरदान देकर वायुदेव को शांत किया। रामदूत, सात चिरंजीवियों में से एक हनुमान की चरित्र रामायण में विस्तार रूप से...
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